सोमवार, 28 मई 2012

हंगामा है क्यों बरपा


हंगामा है क्यों बरपा

शाहरुख ने गाली दी...शाहरुख ने थप्पड़ मारा...शाहरुख ने धक्का दिया...भई क्या हुआ...ऐसे किस्से तो हम अपने गली-मोहल्ले में रोज़ देखते हैं...सुनते हैं...जब तक मामला चलता है लोग मज़े लेते हैं...मामला खत्म, तमाशा खत्म...भीड़ छंटी और सब अपने-अपने घर को चल दिए...अब हंगामा तो भीड़ के लिए मज़े की चीज़ है...लेकिन इस हंगामे पर तो मीडिया पर चर्चाएं हो रही हैं...पूरा दिन टेलीविज़न चैनलों पर शाहरुख ही शाहरुख दिख रहे हैं...शाहरुख तो झगड़ा कर अपने घर में सो गए...लेकिन तमाशा देखने वाले जागते रहे...चटखारे लगाते रहे...लोगों को बीती रात का किस्सा सुनाते रहे...किसी को इस मामले में मसाला दिखा तो...मामले राई से पहाड़ भर हो गया...ऐसे में जो उन पर कार्रवाई नहीं भी करना चाहते थे...मामले को इतना बड़ा रुप देते देख लगा दिया शाहरुख पर 5 साल का बैन...अरे भई बैन टीवी में फिल्मों में काम करने का थोड़े ही है...बैन पैसा कमाने से रोकने पर थोड़े ही है...बैन तो एक खास स्टेडियम में मैच देखने पर है...लेकिन बैन तो बैन है...और ये बात सुपर स्टार शाहरुख को कैसे बर्दाश्त हो...शाहरुख को बर्दाश्त हो तो हो लेकिन भला उनके चाहने वालों को...कैसे बर्दाश्त हो...उनसे फायदा पाने वालों को कैसे हो...तो जुट गई एक लॉबी उनके समर्थन में ये बैन हटाने के लिए....अब बात बड़े पैसे वाले की है...बड़े रुतबे वाले की है...तो सिर झुकेंगे ही...लेकिन ये पैसा का रौब कब तक चलेगा...जब तक पैसा चलेगा...जिस दिन पैसा खत्म...रुतबा भी खत्म...इसलिए ही तो कहते हैं कि पैसे की माया अपरमपार है...पैसा ही रंग रूप है, पैसा ही माल है...पैसा न हो तो आदमी चर्खे की माल है...पैसा जो होवे पास तो कुन्दन के हैं डले...पैसे बगैर मिट्टी के उस से डले भले...पैसा जो हो तो देव की गर्दन को बाँध लाए...पैसा न हो तो मकड़ी के जाले से खौफ खाए...पैसे से लाला भैया जी और चौधरी कहाए...बिन पैसे साहूकार भी इक चोर-सा दिखाए...पसा ही रंग रूप है पैसा ही माल है...पैसा न हो तो आदमी चर्खे की माल है।

कोई टिप्पणी नहीं: